Sunday 16 July 2017

मुझे नहीं लगता कि
अपने देश में अब किसी भी विधा के जानकारों मसलन
* डाक्टर/नर्स
* इन्जीनियर
* CA/इकोनामिस्ट
* अध्यापक
* अधिकारी
* नेता
* साहित्यकार
* नाटककार
* कलाकार
* पत्रकार
* वकील
* धन्धेवाले
आदि की कोई कमी है, और उनके चलते इस देश मे समस्यायें तो अब कम ही होनी चाहिये, ऐसा माना जाना चाहिये
किन्तु निरंन्तर बढ़ती समस्यायों के चलते ऐसा महसूस होता है कि इन पढे-लिखे, समझदार और जिम्मेदार लोगों में से काफी लोग पथभ्रष्ट हो गये हैं, कारण
* स्वार्थ भी हो सकता है
* भ्रष्टाचार भी हो सकता है
* जल्दी ज्यादा पैसा कमाने की चाहत भी हो सकती है
* किसी का दबाव भी हो सकता है
* कोई मजबूरी भी हो सकती है
आदि-आदि
कारण चाहे कुछ भी हो, किन्तु कोई भी कारण इन्हें यदि पथभ्रष्ट कर देश में समस्याएं बढ़ा रहा है,
तो
ऐसे लोगों को सच्चा देशभक्त तो कदापि नहीं माना जा सकता है न

कबीरदास जी बहुत पहले ही बता गये हैं......
बुरा जो देखन मैं चला, बुरा न मिलया कोय
जो  देखा  मन आपनो, मुझसे  बुरा न कोय

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