Saturday 31 October 2009
मजबूरियाँ, गिले-शिकवे और प्रगति पर प्रकृति की मार
Friday 30 October 2009
Saturday 24 October 2009
भय, महत्त्व / महत्वहीन......
१९ अक्टूबर की पोस्ट पर आपकी टिप्पणियों पर आभारव्यक्ति
Monday 19 October 2009
स्ट्रेस भविष्य और अंत में अभारव्यक्ति
आपसे विनम्र निवेदन है कि आभारव्यक्ति को पूर्णतः (डिटेल) में देखने के लिए मेरी १८ अक्तूबर की पिछली पोस्ट भी ज़रूर देखे.
हार्दिक आभार।
Sunday 18 October 2009
आभारव्यक्ति एवं शुभकामनाएं
Monday 12 October 2009
निंदिया का न आना, विद्रोह और अंत में अभारव्यक्ति
निंदिया का न आना
अपनी ५ अक्टूबर की पिछली पोस्ट मैंने एक प्रश्नवाचक अधूरा चुटकला लिखा था और उसे पूरा करने के लिए अनुरोध आप सभी से किया था. बहुत से लोगों ने मसलन हरकीरत जी, वंदना अवस्थी दुबे जी, समीर (उड़न तश्तरी) जी, अल्पना जी आदि ने चुटकले अनुरूप उचित उत्तर दिया. अतः पूर्ण चुटकला कुछ इस प्रकार है........
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पहले का प्रश्न: यार कमरे में सभी खिड़की, दरवाजे और रोशनदान वगैरह अच्छी तरह बंद कर एसी चालू रख निंदिया के बिस्तर में आने की प्रतीक्षा की, फिर भी ससुरी निंदिया आई ही नहीं, आखिर क्यों.....?
"दूसरे" का उत्तर: जब आने के सब रास्ते बंद कर रखा है तो ससुरी निंदिया आएगी किस रास्ते से भाई.........
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उपरोक्त चुटकला सुनकर हम हंस भले लें पर क्या कभी गहराई से सोंचा है कि
* ज्यादातर वे लोग जो खुले गगन के तले सोने वाले हैं,
* मेहनत मशक्कत कर जीने वाले जहा पड़ गए वहीँ पर,
* रिक्शे वालों को रिक्शे पर कैसे भी पड़े-पड़े,
* दारू पीकर गटर में या सड़क पर पड़े- पड़े भी
* पढ़ने की इच्छा न होने पर क्लास में बैठे- बैठे ,आदि-आदि प्रतिकूल परिस्थितियों में भी
निश्चिंत, बढ़िया और ताजगी भरी नींद कैसे पा लेते हैं. वहीँ दूसरी ओर मुलायम गद्दे पर भी, एसी के वातावरण में भी, बिस्तर पर लेट कर कोशिश करने पर भी, नींद की गोलियों के आदियों को नींद की गोलियां एक-आध कम खाने पर भी नींद क्यों नहीं आती?
इस पर ही नहीं बल्कि कबीर ने तो और भी बहुत कुछ समेटते हुए अपने काफी विस्तृत सपाट उदगार दोहे के रूप में सिर्फ २८ मात्राओं में ही कुछ इस प्रकार व्यक्त कर दिया हैं .....
कामी लज्जा न करै , मन माही अहलाद
नींद न माँगें साथरा, भूँख न माँगें स्वाद.
कबीर जी ने तो नींद से ज्यादा प्यार करने वालों और सपने लेकर सोने वालों को भी नहीं छोडा और बस कह ही दिया.....
जागो लोगों मत सुवो, ना करू नींद से प्यार
जैसा सपना रैन का , ऐसा यह संसार
सपने सोया मानवा , खोलि जो देखै नैन
जिव परा बहु लूट में, ना कछु लेन न देन
और तो और कबीर जी निश्चिंत सोने वालों के लिए भी कह गए....,,,
कबीर गाफिल क्यों फिरे, क्या सोता घनघोर
तेरे सिराने जम खडा , ज्यूँ अंधियारे चोर
मैं कबीर की तुलना में एक तिनका भी ज्ञानी तो नहीं पर मानवीय फितरत से बाज़ नहीं आता सो अपनी राय तो देनी ही पड़ेगी.....
मेरे हिसाब से कुल मिला कर इसका सम्बन्ध शरीर की मानसिक और शारीरिक शिथिलता से है. माहौल और मानसिक स्थिति जितनी जल्दी शरीर में शिथिलता ले आती है, विपरीत परिस्थितियों (बिना आरामदायक परिस्थितियों) में भी नींद कहीं बेहतर आती है......
* तभी तो सड़क पर सो रहे लोग बेखबर ही रह जाते हैं और गाडियां उनकर ऊपर से निकल जाती हैं, बाद में पत्रकार टी. वी. वाले समाचार को कैसा भी सनसनीखेज बनाते रहे.
* रेल गाड़ी के जनरल डिब्बे में भूसे की तरह भरे होने पर भी लोग-बाग़ मस्त नींद निकाल ही लेते हैं, वहीँ रिजर्वेशन वाले सारी रात करवटें ही बदलते रहते हैं.
कुछ ऐसी ही सार्थक युक्ति मनोज भारती जी ने अपने उत्तर में कुछ इस प्रकार दी है....
"यूं तो आपने निंदिया लाने के सारे बाह्य उपाय किए हैं, पर निंदिया रानी को लाने के लिए बाहर के उपायों से ज्यादा अंदर के उपायों की जरुरत होती है ; कोशिश से वह कभी नहीं आती !!! सब कोशिश छोड़ दीजिए और निश्चेष्ट होकर लेट जाइए और स्थिति को स्वीकार कर लीजिए"
नींद एक प्राकृतिक प्रक्रिया है और प्राकृतिक रूप से ही इसे पुनर्शक्ति के लिए प्राप्त किया जा सकता है.
एक अच्छी नींद शरीर में पौ फटते ही शरीर में असीम शक्ति का संचार कर देती है. फिर से दिन भर की सकून भरी मशक्कत, दौड़-भाग के लिए..
प्रकृति के सभी प्राणी स्वाभाविक नींद प्राप्त करते हैं, फिर प्रकृति के सर्वश्रेष्ठ कहे जाने वाले प्राणी को स्वाभाविक नींद पाने के लिय इतनी जद्दोज़हद क्यों, कहीं न कहीं उसने गलती की है, प्रकृति को नकारा है, तभी तो...... बेचारा कैसे भी कर्मों से असीम धन- दौलत पाकर भी परेशान है इक सकून भरी नींद पाने को......
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एक छोटी रचना
विद्रोह
होती नहीं मार की पीडा
बात की धार से गहरी
गूंज उठे क्यूँ न गगन में
"विद्रोह" की स्वर-लहरी.
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और अंत में ......
* पहला समाचार
"ओबामा" को "नोबेल शांति पुरुस्कार"
* दूसरा समाचार
"ओबामा" ने खुद को "नोबेल शांति पुरुस्कार" से नवाजे जाने पर हैरत जताई.
* तीसरा समाचार
नोबेल समित की सफाई " ओबामा जैसी शख्शियत वाले बहुत लम लोग होते हैं, जो दुनिया का ध्यान अपनी और आकृष्ट कर के लोगों में सुखद भविष्य की आस जागते हैं"
* चौथा समाचार
चाँद पर अमेरिका का रॉकेट से धमाका
* पांचवा समाचार
अभी तो चाँद पर बस्ती बसनी भी शुरू नहीं हुई और नोबेल शांति पुरुस्कार से नवाजे गए बराक ओबामा की अगुवाई में अमेरिका का चाँद पर भी शांति के नाम पर अभियान शुरू भी हो गया.
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आभारव्यक्ति
मेरी ५ अक्टूबर की पोस्ट पर प्राप्त आप सब की बहुमूल्यवान, सारगर्भित, प्रेणादायक, हौसलाअफजाई परक या आलोचनात्मक टिप्पणियों पर मैं अपनी आभारव्यक्ति अपनी ११ अक्तूबर की पोस्ट "अभारव्यक्ति" में ही सादर व्यक्त कर चुका हूँ. आपसे विनम्र निवेदन है कि आभारव्यक्ति को पूर्णतः (डिटेल) में देखने के लिए मेरी ११ अक्तूबर की पिछली पोस्ट देखे.
हार्दिक आभार।
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