Saturday 11 July 2009

अग्नि से तो गुजरना ही पड़ेगा

और गुज़र गए........
अपने पिछले ब्लाग में मैंने लिखा था "भाव है कि "प्रभु की प्यारी, भोली रचना क्या से क्या हो जाती है...."पसंद आये तो अपने आशीष से नवाजें, फालतू लगे तो कड़ी आलोचना से भी गुरेज न करें, क्योंकि
* यही सच्चा शिक्षक है.........
* सोना भी तप कर ही निखरता है..............
*अग्नि हर चीज़ को शुद्ध कर देती है............................
* फिर मुझ जैसे नासमझ को निखरने के लिए आलोचना की अग्नि से तो गुजरना ही पड़ेगा............... "

अब मुझे ऐसा प्रतीत होता है की लिखना अपने वश की बात नहीं, ऐसा नहीं की आप में से किसी ने भी बहुत कड़ी आलोचना कर डाली, बल्कि आर्श्चय इस बात पर हो रहा है की मैं उपरोक्त बातें कैसे लिख गया, शायद ऊपर वाले ने सचेत करने की कोशिश की थी और मुझसे ऐसा लिखवाया था।

पिछली पोस्ट प्रकाशित करने के दो दिन के अन्दर ही मैं ३० जुलाई को मुझे अग्नि से गुजरना पड़ा, इसे दैवीय आपदा कहें या वरदहस्त की बिजली के अचानक जबरदस्त फ्लैश से निकली चिंगारी से महज मेरा दायां हाथ ही झुलसा और मै, मेरा पूरा शरीर बाल-बाल बच गया। यही नहीं वहां पर मौजूद अन्य सभी भी पूर्णतः बच गए.

शायद किसी बुरी शक्ति पर दैवीय अनुकम्पा से यह जीत ही है और शायद यही कटु सत्य भी...........अपने घायल हाथ की तस्वीर प्रस्तुत कर मैं आप लोगों का मन खिन्न करना नहीं चाहता. आशा है अगले दस-बारह दिनों में घाव पूर्णतः भर जायेगा.

आजकल सब्जियों, दालों के भाव आसमान छू रहे हैं, माना की सब्जियों पर मौसम की मार है पर दाल पर????

साल डेढ़ साल पहले की ही बात है जब क्रूड आयल ४०-५० डालर प्रति बैरल से १५०-१६० डालर प्रति बैरल पहुँच गया था और पुनः वापस ४० -५० डालर पर देखते ही देखते आ गया, न उत्पादन बदला, न कुछ और। कारण सिर्फ और सिर्फ वायदा बाज़ार, या कहें की पैसे की ताकत से दुनिया हिलाने का बाज़ार.

आज वैसा ही कुछ दाल के साथ चल रहा है. जमाखोरों को तो स्टाक करने के लिए जगह की व्यवस्था करनी पड़ती है पर इस वायदा बाजार में तो पैसे की ताकत से भाव कही भी ले जा सकने की खुली छूट है..........................

"दाल-रोटी भी चलना मुहाल" पर बात चली तो किसी ने कहा भाई अपुन तो माछी- झोल की तरह दाल- झोल से ही कम चला लेंगें, बाकि कम तो नमक कर देगा न। शायद झोल का महत्व बड़ी सहजता से समझ में आ गया....बजट भी न गड़बड़ायेगा...............

वक्त की ही तो बात है, ये दाल भी औकात पर आ जायेगी, ज्यों ही बुल महोदय प्राफिट बुकिंग पर उतर आयेंगे....

क्या होना चाहिए, क्या हो रहा है, क्या कर रहे हैं क्यूं कर रहे है जैसे असंख्य प्रश्न विपदा आते ही खड़े हो उठते हैं और समय गुजरते ही सब भूल जाते हैं, और इतिहास फिर - फिर अपने आप को दोहराता रहता है......

ये तो रहे मेरे अपने विचार, अपनी श्रद्धा, अपने विश्वास के सहारे, आपकी जानने की उत्सुकता है........

25 comments:

रश्मि प्रभा... said...

अग्नि से तो गुजरना ही पड़ेगा

राज भाटिय़ा said...

इसे दैवीय आपदा कहें या वरदहस्त की बिजली के अचानक जबरदस्त फ्लैश से निकली चिंगारी से महज मेरा दायां हाथ ही झुलसा और मै, मेरा पूरा शरीर बाल-बाल बच गया।
भगवान का धन्यवाद आप बच गये, बाकी आप कोई वहम मन मै ना पाले !!ऎसा कुछ नही होता, बस एक दुर्घटना होनी थी सो हो गई.
बाकी महंगाई सिर्फ़ भारत मै ही ज्यादा हो रही है, ओर अन्य देशो मै चीजे मंहगी तो होती है लेकिन इतनी नही जितनी भारत मै, हमारे यहां अगर तेल महंगा होता है तो सस्ता भी हो जाता है, महंगाई भी साल मे एक आध पेसा ही बढती है, लेकिन हमारे यहां(भारत) मे तो हर चीज मिल तो जाती है, लेकिन दुगने तीगने दामो मै, पता नही क्यो???

चलिये अब आप जल्द से ठीक हो जाये, बहुत बहुत शुभकामान्ये

Pt.डी.के.शर्मा"वत्स" said...

चन्द्रमोहन जी, यह उस परमात्मा की आप पर विशेष अनुकम्पा ही है कि इस दुर्घटना में आपको किसी भीषण क्षति का सामना नहीं करना पडा। आपके पास तो श्रद्धा का भण्डार है। वैसे भी जिसके दिल में श्रद्धा होती है,उसका तो कोई अहित हो ही नहीं सकता।
शीघ्र स्वास्थयलाभ हेतु शुभकामनाएं......

Harsh said...

bahut achchi post hai..........

ज्ञानदत्त पाण्डेय | Gyandutt Pandey said...

ओह, शुक्र है आप बच गये। पता नहीं, संयोग ने बचाया या श्रद्धा ने। पर श्रेय श्रद्धा या आस्था को देने से मन संयत अवश्य रहता है।

BrijmohanShrivastava said...

ईस्वर सबकी रक्षा करता है ,कहते है पुण्य आड़े आजाते हैं =जहाँ तक आपके लेख की बात है दुष्यंत जी पहले ही कह चुके है ""कहाँ तो तय था चरागाँ हरेक घर के लिए : कहाँ चराग मयस्सर नहीं शहर के लिए ""

hem pandey said...

आप बड़ी दुर्घटना से बच गए. यह आप, आपके परिवार के साथ हम सब का सौभाग्य है. आज कल दाल ही नहीं तमाम जरूरी चीजों की महंगाई से जनता त्रस्त है.महंगाई कम करने के लिए फिलहाल सरकार को कोई कदम उठाने की जरूरत नहीं है क्योंकि चुनाव सन्निकट नहीं हैं.

श्याम कोरी 'उदय' said...

... मँहगाई, बजट, दाल-रोटी, माछी-झोल .... बहुत खूब, प्रभावशाली अभिव्यक्ति !!!

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

ईशवर का धन्यवाद!
वाकई में मँहगाई चरम पर है।
चिन्तनीय।

Babli said...

बहुत बढ़िया लिखा है आपने! हर चीज़ महँगी होती जा रही है और लोगों को बहुत कठिनाइयाँ झेलनी पड़ रही है! आपकी लेखनी को सलाम!

Prem Farrukhabadi said...

पढ़कर अच्छा लगा बहुत बहुत शुभकामान्ये.

Harkirat Haqeer said...

चन्द्र मोहन जी ,

एकदम से सकते में आ गयी ....कितना झुलसा ....ज्यादा तो नहीं ....? ..भगवान से दुआ है आप जल्दी स्वस्थ हों ......ये बिजली भी आप पर ही गिरनी थी ....मुई बारिश तो होती नहीं ....!!

mark rai said...

achchha hai..dal roti ka jugaad to hona hi chaahiye..zindagi ka sawaal hai bhai....agni se to gujrna hi padta hai..sone ko......

ज्योति सिंह said...

main raaj ji ki baton se sahamat hoon ,maarane wale se bachanewala bahut balwaan hota .jiske saath ishwar hai uska baal bhi banka nahi hota .aap sahi salamat hai ye usi ki kripa hai .hame uska shukra guzar hona chahiye .

Shobhana said...

Eshvar APKO shreeghra svsth kre .dal roti ne tosbko behal kar rkha hai .
tano se anaj sarkari godamo me sadte hai aur chuhe chat kar jate hai .bajar to hai hi iska utardayi par srkari vitarn prnali ko bhi sajg rhna hoga .
shubhkamnaye .

दिलीप कवठेकर said...

parameshvar kee kRupaa rahee aapa par.

Dr.T.S. Daral said...

अतिशीघ्र स्वास्थय लाभ की शुभकामना करता हूँ. वैसे बचाने वाला भी वही ऊपर वाला ही होता है. आदमी को तो खाली अच्छे कर्म करते रहना चाहिए.

वन्दना अवस्थी दुबे said...

ऐसे ही चमत्कार ईश्वर के अस्तित्व को पुख्ता करते हैं..

sandhyagupta said...

Aap jaldi swasth ho jayen aisi kamna hai.

आनन्द वर्धन ओझा said...

मेरे ब्लॉग पर पधार कर आपने न सिर्फ रचना पढ़ी, बल्कि अपनी टिपण्णी से मुझे उपकृत भी किया है; आभारी हूँ. 'गाओ ऐसा गान...' आपको अछि लगी, यह जान कर प्रसन्नता हुई. आपके ब्लॉग पर भी पदाघात कर आया हूँ, विस्तार से फिर कभी लिखूंगा. अभी इतना ही... सप्रीत...

Mumukshh Ki Rachanain said...

भाई संजय व्यास जी ने जो इ-मेल मुझे प्रेषित किया, उसे वैसे ही प्रस्तुत कर रहा हूँ............
"hope for ur speedy recovery"
sanjay vyas

विनोद कुमार पांडेय said...

achche logo ke sath bhagwaan achcha hi karata hai..

ab aap bilkul thik ho jayegnge
aur aage ham aapki rachnaye padhana chahate hai>>

jald hi intzaar karrahe hai..

अल्पना वर्मा said...

बहुत ही दुःख हुआ यह जानकार की आप के हाथ में इस तरह से चोट आई.शुक्र है की आग फैली नहीं.बहुत दिनों बाद आई हूँ आप की इस पोस्ट पर.उम्मीद है अब तक कुछ घाव भर गए होंगे.जल जाने पर बहुत ध्यान रखना पड़ता है.इस तरह के घाव में इन्फेक्शन भी जल्दी हो जाता है इस लिए आप मरहम ,दवाई सब डॉक्टर के बताये अनुसार करीए और आराम भी किजीये.
ईश्वर में आस्था बहुत बलवान होती है.
शीघ्र स्वास्थ्यलाभ करें.शुभकामना है.

Hari Shanker Rarhi said...

आपका परिचय पाकर अच्छा लगा. आप दुर्घटना में सही सलामत बच गये. ईश्वर का धन्यवाद .
हरिशंकर राढी.

नीरज गोस्वामी said...

गुप्ता जी आप स्वस्थ और प्रसन्न हैं जान कर ख़ुशी हुई..."जाको रखे साईयाँ...." आपजैसे नेक दिल इंसान की आज के युग में बहुत जरूरत है इसलिए चिंता न करें आपको कुछ नहीं होने वाला...शीघ्र स्वस्थ लाभ करें इश्वर से ये ही प्रार्थना है...
नीरज