Mumukshh Ki Rachanain
Thursday, 20 March 2008
श्रद्धा
श्रद्धा
(३०)
है किस्मत एक पहेली ऐसी
जो
सिंचित केवल कर्मों से होती है
कहने दो लोंगों को कुछ भी
"गीता" में ही ज्ञानों का मोती है
छोड़ सभी तुम फल कि इक्षाएं
अपने कर्मों में तल्लीन बनोगे
अनायास श्रद्धा में ऐसा जा डूबोगे
पाओगे सीप वही जिसमें मोती है
1 comment:
नीरज गोस्वामी
20 March 2008 at 4:59 pm
अति सुंदर..वाह
नीरज
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अति सुंदर..वाह
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