श्रद्धा
(३१)
हे राम ! तुम्हारी रामायण को
कब किसने समझा- जाना है
दिए उदाहरण स्वार्थ हेतु ही
समझा इसको ताना- बाना है
करें कल्पना राम - राज्य की
पर हरकत विपरीत मिले हरदम
आदर्श रचोगे हो श्रद्धा में रत
तभी राम - राज्य को आना है
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