Mumukshh Ki Rachanain

Sunday, 18 October 2009

आभारव्यक्ति एवं शुभकामनाएं

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आभारव्यक्ति मेरी पिछली पोस्ट " निंदिया का न आना, विद्रोह और अंत में अभारव्यक्ति" ( १२ अक्टूबर ) पर प्रतिक्रिया व्यक्त करने वाल...
Monday, 12 October 2009

निंदिया का न आना, विद्रोह और अंत में अभारव्यक्ति

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निंदिया का न आना अपनी ५ अक्टूबर की पिछली पोस्ट मैंने एक प्रश्नवाचक अधूरा चुटकला लिखा था और उसे पूरा करने के लिए अनुरोध आप सभी से किया था. ...
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Sunday, 11 October 2009

आभारव्यक्ति

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मेरी पिछली पोस्ट "दिल की पाती.... , विद्रोही, अंत में, आभारव्यक्ति" (५ अक्टूबर ) पर प्रतिक्रिया व्यक्त करने वाले निम्न सभीसम्मान...
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Monday, 5 October 2009

दिल की पाती.... , "विद्रोही", अंत में, आभारव्यक्ति

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दिल की पाती.... हे मेरे आवरण रूपी शरीर, मैं तेरे ही अन्दर बैठा तेरे हर कृत्यों का सहज अनुभव अनवरत आत्मसात करता रहता हूँ, मुझसे तेरा जाने- अन...
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Sunday, 4 October 2009

आभारव्यक्ति

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विनम्र निवेदन पिछली कई पोस्ट पर हमारे कुछ सम्माननीय समालोचक हमसे विनम्र निवेदन करते आ रहे हैं कि ब्लॉग पोस्ट में टिप्पणी देने वालों के प्रति...
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Monday, 28 September 2009

कैसी संतुष्टि कैसा जुनून, महक उठे सारा वतन और आभारव्यक्ति

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कैसी संतुष्टि कैसा जुनून दैनिक नवज्योति के २४ सितम्बर के अंक में एक समाचार या कहें अजीबोगरीब खबर ने मुझे उसे आप सब के समक्ष अपने मनोभाव के स...
52 comments:
Monday, 21 September 2009

दुर्गा पूजा, ईद, दशहरा, आमरण अनशन, इंसानों कि उलट कथा, मितव्ययिता और आभारव्यक्ति

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दुर्गा पूजा, ईद, दशहरा, आमरण अनशन, इंसानों कि उलट कथा, मितव्ययिता और आभारव्यक्ति दुर्गा पूजा, ईद, दशहरा कितना अज़ब संयोग है, प्रकृति क...
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Mumukshh Ki Rachanain
मैं बचपन से ही स्वान्तः-सुखाय प्रवृत्ति का रहा हूँ. परीक्षाओं में ज्यादा अंक लाने से ज्यादा महत्त्व मूलभूत ज्ञान को दिया. इलाहबाद (प्रयाग) शहर का होने के कारण बचपन से ही साहित्य की ओर झुकाव रहा. जब मैं इंजीनियरिंग के अन्तिम वर्ष में था तो उस समय हमने अपने कुछ सहयोगियों( श्री अजामिल जी, प्रदीप सौरभ जी, दिनेश मिश्रा जी आदि) के साथ भारत का प्रथम बाल समाचार पत्र "नन्हें-मुन्नों का अख़बार" प्रकाशित किया था. बचपन से आज तक समय-बेसमय कुछ न कुछ लिखता ही रहा, पर ज्यादातर स्वान्तः-सुखाय ही. पांडुलिपियाँ धीरे -धीरे ब्लोग्स पर अवतरित हो रहीं हैं. इलेक्ट्रिकल मैन्टेनेन्स में होने के कारण आने और महसूस होने वाली दिक्कतों को मद्देनजर रखते हुए मह्तातों के बेहतर कैरियर के लिए कई किताबे भी बिना धन-लाभ की अभिलाषा के स्वान्तः-सुखाय ही लिखी. यूनिवर्सिटी लेवल एवं राज्य स्तर किकेट प्रतियोगिताओं में भी भाग लिया. हिंडाल्को क्रिकेट टीम का कई वर्षों तक सदस्य रहा. बायोकेमिक एवं बैच-फ्लावर चिकत्सा पद्धिति में भी कुछ जानकारी हासिल कर सकने की भी हिमाकत की है. सम्प्रति शेयर मार्केट पर ट्रेडिंग से सम्बंधित एक पुस्तक लिखने में व्यस्त हूँ.
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