निंदिया का न आना
अपनी ५ अक्टूबर की पिछली पोस्ट मैंने एक प्रश्नवाचक अधूरा चुटकला लिखा था और उसे पूरा करने के लिए अनुरोध आप सभी से किया था. बहुत से लोगों ने मसलन हरकीरत जी, वंदना अवस्थी दुबे जी, समीर (उड़न तश्तरी) जी, अल्पना जी आदि ने चुटकले अनुरूप उचित उत्तर दिया. अतः पूर्ण चुटकला कुछ इस प्रकार है........
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पहले का प्रश्न: यार कमरे में सभी खिड़की, दरवाजे और रोशनदान वगैरह अच्छी तरह बंद कर एसी चालू रख निंदिया के बिस्तर में आने की प्रतीक्षा की, फिर भी ससुरी निंदिया आई ही नहीं, आखिर क्यों.....?
"दूसरे" का उत्तर: जब आने के सब रास्ते बंद कर रखा है तो ससुरी निंदिया आएगी किस रास्ते से भाई.........
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उपरोक्त चुटकला सुनकर हम हंस भले लें पर क्या कभी गहराई से सोंचा है कि
* ज्यादातर वे लोग जो खुले गगन के तले सोने वाले हैं,
* मेहनत मशक्कत कर जीने वाले जहा पड़ गए वहीँ पर,
* रिक्शे वालों को रिक्शे पर कैसे भी पड़े-पड़े,
* दारू पीकर गटर में या सड़क पर पड़े- पड़े भी
* पढ़ने की इच्छा न होने पर क्लास में बैठे- बैठे ,आदि-आदि प्रतिकूल परिस्थितियों में भी
निश्चिंत, बढ़िया और ताजगी भरी नींद कैसे पा लेते हैं. वहीँ दूसरी ओर मुलायम गद्दे पर भी, एसी के वातावरण में भी, बिस्तर पर लेट कर कोशिश करने पर भी, नींद की गोलियों के आदियों को नींद की गोलियां एक-आध कम खाने पर भी नींद क्यों नहीं आती?
इस पर ही नहीं बल्कि कबीर ने तो और भी बहुत कुछ समेटते हुए अपने काफी विस्तृत सपाट उदगार दोहे के रूप में सिर्फ २८ मात्राओं में ही कुछ इस प्रकार व्यक्त कर दिया हैं .....
कामी लज्जा न करै , मन माही अहलाद
नींद न माँगें साथरा, भूँख न माँगें स्वाद.
कबीर जी ने तो नींद से ज्यादा प्यार करने वालों और सपने लेकर सोने वालों को भी नहीं छोडा और बस कह ही दिया.....
जागो लोगों मत सुवो, ना करू नींद से प्यार
जैसा सपना रैन का , ऐसा यह संसार
सपने सोया मानवा , खोलि जो देखै नैन
जिव परा बहु लूट में, ना कछु लेन न देन
और तो और कबीर जी निश्चिंत सोने वालों के लिए भी कह गए....,,,
कबीर गाफिल क्यों फिरे, क्या सोता घनघोर
तेरे सिराने जम खडा , ज्यूँ अंधियारे चोर
मैं कबीर की तुलना में एक तिनका भी ज्ञानी तो नहीं पर मानवीय फितरत से बाज़ नहीं आता सो अपनी राय तो देनी ही पड़ेगी.....
मेरे हिसाब से कुल मिला कर इसका सम्बन्ध शरीर की मानसिक और शारीरिक शिथिलता से है. माहौल और मानसिक स्थिति जितनी जल्दी शरीर में शिथिलता ले आती है, विपरीत परिस्थितियों (बिना आरामदायक परिस्थितियों) में भी नींद कहीं बेहतर आती है......
* तभी तो सड़क पर सो रहे लोग बेखबर ही रह जाते हैं और गाडियां उनकर ऊपर से निकल जाती हैं, बाद में पत्रकार टी. वी. वाले समाचार को कैसा भी सनसनीखेज बनाते रहे.
* रेल गाड़ी के जनरल डिब्बे में भूसे की तरह भरे होने पर भी लोग-बाग़ मस्त नींद निकाल ही लेते हैं, वहीँ रिजर्वेशन वाले सारी रात करवटें ही बदलते रहते हैं.
कुछ ऐसी ही सार्थक युक्ति मनोज भारती जी ने अपने उत्तर में कुछ इस प्रकार दी है....
"यूं तो आपने निंदिया लाने के सारे बाह्य उपाय किए हैं, पर निंदिया रानी को लाने के लिए बाहर के उपायों से ज्यादा अंदर के उपायों की जरुरत होती है ; कोशिश से वह कभी नहीं आती !!! सब कोशिश छोड़ दीजिए और निश्चेष्ट होकर लेट जाइए और स्थिति को स्वीकार कर लीजिए"
नींद एक प्राकृतिक प्रक्रिया है और प्राकृतिक रूप से ही इसे पुनर्शक्ति के लिए प्राप्त किया जा सकता है.
एक अच्छी नींद शरीर में पौ फटते ही शरीर में असीम शक्ति का संचार कर देती है. फिर से दिन भर की सकून भरी मशक्कत, दौड़-भाग के लिए..
प्रकृति के सभी प्राणी स्वाभाविक नींद प्राप्त करते हैं, फिर प्रकृति के सर्वश्रेष्ठ कहे जाने वाले प्राणी को स्वाभाविक नींद पाने के लिय इतनी जद्दोज़हद क्यों, कहीं न कहीं उसने गलती की है, प्रकृति को नकारा है, तभी तो...... बेचारा कैसे भी कर्मों से असीम धन- दौलत पाकर भी परेशान है इक सकून भरी नींद पाने को......
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एक छोटी रचना
विद्रोह
होती नहीं मार की पीडा
बात की धार से गहरी
गूंज उठे क्यूँ न गगन में
"विद्रोह" की स्वर-लहरी.
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और अंत में ......
* पहला समाचार
"ओबामा" को "नोबेल शांति पुरुस्कार"
* दूसरा समाचार
"ओबामा" ने खुद को "नोबेल शांति पुरुस्कार" से नवाजे जाने पर हैरत जताई.
* तीसरा समाचार
नोबेल समित की सफाई " ओबामा जैसी शख्शियत वाले बहुत लम लोग होते हैं, जो दुनिया का ध्यान अपनी और आकृष्ट कर के लोगों में सुखद भविष्य की आस जागते हैं"
* चौथा समाचार
चाँद पर अमेरिका का रॉकेट से धमाका
* पांचवा समाचार
अभी तो चाँद पर बस्ती बसनी भी शुरू नहीं हुई और नोबेल शांति पुरुस्कार से नवाजे गए बराक ओबामा की अगुवाई में अमेरिका का चाँद पर भी शांति के नाम पर अभियान शुरू भी हो गया.
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आभारव्यक्ति
मेरी ५ अक्टूबर की पोस्ट पर प्राप्त आप सब की बहुमूल्यवान, सारगर्भित, प्रेणादायक, हौसलाअफजाई परक या आलोचनात्मक टिप्पणियों पर मैं अपनी आभारव्यक्ति अपनी ११ अक्तूबर की पोस्ट "अभारव्यक्ति" में ही सादर व्यक्त कर चुका हूँ. आपसे विनम्र निवेदन है कि आभारव्यक्ति को पूर्णतः (डिटेल) में देखने के लिए मेरी ११ अक्तूबर की पिछली पोस्ट देखे.
हार्दिक आभार।
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बहुत सुंदर बत कही आप ने मन की शान्ति हो तो आदमी को पत्थर पर भी नींद आ जाती है..
ReplyDeleteबाप अपने बेटे से बोला जाओ तुम ने सुबह जल्दी उठना है...शान्ति से सो जाओ
सुबह बाप बेटे के कमरे मै गया बेटे को जगाने तो सथ मै काम वाली वाई ( शांति)सोई हुयी थी
राम राम
सच ही है अन्तर की निर्दंद्व परिस्थितियाँ ही उत्तरदायी हैं नीद के लिये ।
ReplyDeleteछोटी रचना उत्तम है । आभार ।
mehnat kash insaan ke liye neend naa door
ReplyDeletemasti men sota rahe, thak kar din bhar choor
thak kar din bha choor , neend hai uski chakar
ek baar aajaaye to , jaaye na aakar
kahe swapn gar neend chahiye karo mashakkat
neend na usse door jo insan hai mehnatkash.
निंदिया तो जब तब विद्रोह पर उतारू हो जाती है. आखिर उसके प्राकृतिक स्रोतों पर हम ही तो जबरन सुख की बेडियाँ लगाते रहते हैं.
ReplyDeleteबहरहाल शब्द विद्रोह की मार अन्दर तक महसूस हुई.
sachmein man ki shaanti ka hona bahut zaroori hai.......
ReplyDeletebahut achcha laga padh kar.........
बिल्कुल सही और सटीक विवेचना की आपने नींद की ...बेहतरीन दोहों से आपने सजाया..मैने कबीर के इन सुंदर दोहों को कभी पहले पढ़ा ही नही था आज पढ़ा कर अच्छा लगा तो सारा धन्यवाद तो आप को ही जाता है.
ReplyDeleteऔर आपकी चार लाइन भी बहुत अच्छी लगी.....धन्यवाद गुप्ता जी
ek achchhe neend ki kitni ahmiyat hai yah to wohi bata sakta hai jo mahruum hai is se.
ReplyDeleteBahut achchhee vivechana ki hai aap ne.
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End mein likha hua bhi sab saty hi hai..
नींद का सबंध मस्तिष्क से है और हमने मस्तिष्क को गोदाम बना लिया. ट्रेन में ठसाठस भरे डिब्बे में नींद तब आती है जब मस्तिष्क खुला होता है. आपने बहुत अच्छी जानकारी दी, धन्यवाद.
ReplyDeletebahut hi saargrbhit prastutikaran......
ReplyDeleteनिंदिया का न आना ...बहुत सटीक लेख है.
ReplyDeleteबधाई
बहुत अच्छी बात बताई ! और एक अच्छी बात ये भी है नींद न आने वजह है टेंशन !! आपने जो बात कही की लेट जाइए नींद का इन्तजार मत कीजिये बिना ये टेंशन लिए की नींद आजाये | जैसे अगर हम ये सोचें की हमने खाना खा लिया और पचाना भी हमारी एक क्रिया है | जो स्वत: होती है अगर हम ये टेंशन लें की अभी खा तो लिया पचाना भी है तो बदहजमी हो जाये!!
ReplyDeleteYour story & style is interesting. u have raised a multilayer ed riddle. all r r may correct or not
ReplyDeleteनींद पर चर्चा पढ़कर, स्कूल की किताब में पढ़ा एक आलेख याद आया.. 'सुखी कौन है?' उसमें भी ऐसी ही चर्चा थी.
ReplyDeletemain aapke blog par do baar aai aur lekh padhte samya hi light chali gayi ,yahan bijli ki bahut samsaya hai jiski wazah se kaam adhoore rah jate hai .aapne jo kabir ke dohe ko lekar lekh likha hai wo behad shaandar hai ,rahi baat nind ki to chinta me nahi nishchintta me hoti hai ,jitni suvidha utni duvidha .ek pauranik katha yaad aa gayi is nind ke upar .umda .achchhi nind bhi kismat se judi hai .
ReplyDeleteजिन्होने सबको नींद से जगाने का ठेका ले रक्खा है उन्हें भी नींद नहीं आती
ReplyDeleteकबीर जी के दोहों में एक दोहा ये भी जोड़ दें ....
ReplyDeleteरैन गवाई सोई के दिवस गवायो खाए
हीरा जनम अमोल था कौड़ी बदले जाए
चाँद पर विस्फोट....?
शायद धरती का अस्तित्व खत्म होने से पहले मनुष्य वहाँ रहना शुरू कर दे .....!!
कबीर का एक दोहा और :
ReplyDeleteसोता साध जगाइये, करै राम का जाप
ये तीनों सोते भले, साकत,सिंह और सांप ।।
आप सोए हुए साधुओं को जगाने का काम भली-भांति कर रहें हैं ।
मेरी शुभकामनाएँ ।
बहुत ही सारगर्भित बात कही आपने.......यदि हमारा अन्तर द्वन्दमुक्त हो तो निद्रा को तो आना ही है...चाहे इन्सान काँटों पे लेट जाए,तब भी ।
ReplyDeleteदोहों से सजी एक बढिया प्रस्तुति......
वाह बहुत बढ़िया लिखा है आपने! पढ़कर इतना अच्छा लगा की आपकी तारीफ के लिए शब्द कम पर गए! जब इंसान के मन में शान्ति हो तब सुकून से सो सकता है! अच्छी नींद की सभी को ज़रूरत है ताकि फिर से सुबह से रात तक दौर धुप किया जा सके!
ReplyDeleteएक अच्छी बात को बहुत सुन्दर ढंग से और दोहों से सजा कर कहने से उस बात की उपयोगिता और बढ गयी है सुन्दर प्रस्तुति आभार्
ReplyDeleteवास्तव में, नींद विषय पर यदि सभी सोचने लग जायें तो ये संसार नर्क नहीं रह जायेगा।
ReplyDeleteसोता साध जगाइये, करै राम का जाप।
- ये लाईन साधोचित मूल प्रकृति का प्रमाण बताती है।
अति सुन्दर भाई . बधाई!!
ReplyDeleteअनिद्रा का बहुत अच्छा विश्लेषण किया है आपने. कबीर के दोहे बड़े तर्कसंगत रहे. बहुत बढ़िया गुप्ता जी.
ReplyDeleteRAJNISH PARIHAR जी का कमेन्ट जो मुझे मिल पर मिला:
ReplyDeletegood idea sir ji....
बहुत बढिया पोस्ट लिखी है।बधाई।
ReplyDeleteहोती नहीं मार की पीडा
ReplyDeleteबात की धार से गहरी
गूंज उठे क्यूँ न गगन में
"विद्रोह" की स्वर-लहरी.
-बहुत सही व्याख्या की है..
नहीं कोइ संसार में रैना जैसी माय
ReplyDelete.......................
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पूर्ति आप करें।
नींद न आने का एक पक्ष व्यसन भी है। व्यसन कई तरह के हो सकते हैं। मैंने तो ऐसे भी देखे हैं जिन्हें 'जागने का ही व्यसन' है। :(
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उत्तम रचना। यह रंग बिरंगापन आँखों में चुभता है। विशेषकर रात को देर तक जागी आँखों को .... ;)
" padhaker bahut hi accha laga ...behtarin likha hai aapne shanti ki neend ke baare me ...neend aur kabir saheb ke dohe dono bahut hi acchi gaherai wale bane hai ...in dono ka aapne jo taal mel rakha hai vo kabile tarif hai "
ReplyDelete----- eksacchai { AAWAZ }
http://eksacchai.blogspot.com
बहुत ही सही कहा आपने मन में यदि सुकून हो तभी सारे सुख है वर्ना सब बेकार ।
ReplyDeleteजब दिल शांत होगा तभी निनी आएगी न सही कहा सुन्दर लेख ..शुक्रिया
ReplyDeleteneend ka vivechan sahi hai .... aapki 4 laaino ki rachna gazab ki hai ..
ReplyDeleteneend...naseeb vaalo ko hi aatee heiji. bahut khoob likhaa he aapne/
ReplyDeletesaath hi kabeer aour apanee chaar line..waah/
सार्थक व सटीक चिंतनमयी बेहतरीन पोस्ट....
ReplyDeletechanra mohan ji aapko saparivaar diwali ki dhero badhai .
ReplyDeletemann ki shanti hi to sabkuch hai....
ReplyDeleteआपकी बातें तो सीधे दिल में उतर गईं।
ReplyDeleteधनतेरस, दीपावली और भइया-दूज पर आपको ढेरों शुभकामनाएँ!
नींद का दर्शन बड़े ही सहज और विनोदपूर्ण तरीके से समझा गए आप.एक अच्छी नींद आज एक कभी कभार प्राप्त होने वाला उपहार हो गया है.
ReplyDeleteबहुत सुंदर बात बताई आपने
ReplyDeleteमन की शान्ति हो तो आदमी को
पत्थर पर भी नींद आ जाती है
आभार ।
सुख, समृद्धि और शान्ति का आगमन हो
जीवन प्रकाश से आलोकित हो !
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दीपावली की हार्दिक शुभकामनाए
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हम क्या कहें, लम्बे अर्से से इन्सोम्निया से ग्रस्त हैं!
ReplyDelete"आओ मिल कर फूल खिलाएं, रंग सजाएं आँगन में
ReplyDeleteदीवाली के पावन में , एक दीप जलाएं आंगन में "
......दीवाली की हार्दिक शुभकामनाएँ |
Deepawali ki dheron shubkamnayen.
ReplyDeleteबहुत सुन्दर पोस्ट । देर से आने के लिये क्षमा चाहता हूँ । आपको दीपावली की हार्दिक शुभकामनायें । आभार
ReplyDeleteबहुत सुन्दर पोस्ट.आपको दीपावली की हार्दिक शुभकामनायें.
ReplyDeleteदीपावली की हार्दिक शुभकामनायें
ReplyDeleteबहुत कुछ कह गये कबीर के साथ आप भी इस नींद के बारे में पर दिन भर सच्ची लगन से काम करो तो रात को नींद आ ही जाती है ।
ReplyDeleteधीरे - धीरे रे मना , धीरे सब कुछ होए
ReplyDeleteमाली सींचे सौ घडा, ऋतू आये फल होए
nice