Mumukshh Ki Rachanain

Sunday, 28 June 2009

प्रभु की प्यारी, भोली रचना क्या से क्या हो जाती है....

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जब श्रद्धा की पचपनवी कड़ी पिछली पोस्ट में पेश की तो सहसा मुझे प्रभु ने एक दिन अपने बचपन के हँसमुखपन की याद दिला दी, और थोड़े से प्रयास एवं प्...
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Saturday, 20 June 2009

श्रद्धा

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सर्वप्रथम आप सभी से विगत एक माह की खिचीं दूरियों की क्षमा याचना। व्यक्तिगत अति-व्यस्तता के कारण ब्लॉग जगत से पूर्णतः ही कटा रहा। न ही किसी ...
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Wednesday, 20 May 2009

श्रद्धा

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श्रद्धा (५४) पाता सागर कैसे इतना जल हिमशिखर यूँ अगर नहीं पिघलता मेरुशिखर पर कैसे हिम जुटता बन वाष्प समुद्र जल यदि न उड़ता दे रही ...
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Monday, 11 May 2009

बुनियाद गज़ब शोरों पर है

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बुनियाद गज़ब शोरों पर है असहाय पड़ा इस भू पर रह-रह चीखें गूँज रही हैं सुनी,अनसुनी करती दुनिया 'ग्लैमरस' ही पूज रही है बन उठा '...
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Monday, 4 May 2009

श्रद्धा

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श्रद्धा (५३) लुका- छिपी का है खेल निराला बच्चों से बुड्ढों तक नें खेला रहे बदलते पर मंतव्य सदा निश्छल निःस्वार्थ हुआ म...
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Monday, 27 April 2009

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दासी कहलाने में गौरव रहने दो मुझको चरणों में हैं पत्थर के तो क्या हुआ हाड़- मांस का मानव भी अब पत्थर -सा ही बुत बना हुआ चाहा दिल ...
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Monday, 20 April 2009

श्रद्धा

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श्रद्धा (५२) छोड़ दिया चूजों ने भी माँ-संग फुदक -फुदक जब उड़ना सीखा रही चाह , उत्साह जब तलक गगन-नापने में ही उठना दीखा उदर- अग्नि ने सुध धर...
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Mumukshh Ki Rachanain
मैं बचपन से ही स्वान्तः-सुखाय प्रवृत्ति का रहा हूँ. परीक्षाओं में ज्यादा अंक लाने से ज्यादा महत्त्व मूलभूत ज्ञान को दिया. इलाहबाद (प्रयाग) शहर का होने के कारण बचपन से ही साहित्य की ओर झुकाव रहा. जब मैं इंजीनियरिंग के अन्तिम वर्ष में था तो उस समय हमने अपने कुछ सहयोगियों( श्री अजामिल जी, प्रदीप सौरभ जी, दिनेश मिश्रा जी आदि) के साथ भारत का प्रथम बाल समाचार पत्र "नन्हें-मुन्नों का अख़बार" प्रकाशित किया था. बचपन से आज तक समय-बेसमय कुछ न कुछ लिखता ही रहा, पर ज्यादातर स्वान्तः-सुखाय ही. पांडुलिपियाँ धीरे -धीरे ब्लोग्स पर अवतरित हो रहीं हैं. इलेक्ट्रिकल मैन्टेनेन्स में होने के कारण आने और महसूस होने वाली दिक्कतों को मद्देनजर रखते हुए मह्तातों के बेहतर कैरियर के लिए कई किताबे भी बिना धन-लाभ की अभिलाषा के स्वान्तः-सुखाय ही लिखी. यूनिवर्सिटी लेवल एवं राज्य स्तर किकेट प्रतियोगिताओं में भी भाग लिया. हिंडाल्को क्रिकेट टीम का कई वर्षों तक सदस्य रहा. बायोकेमिक एवं बैच-फ्लावर चिकत्सा पद्धिति में भी कुछ जानकारी हासिल कर सकने की भी हिमाकत की है. सम्प्रति शेयर मार्केट पर ट्रेडिंग से सम्बंधित एक पुस्तक लिखने में व्यस्त हूँ.
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