Mumukshh Ki Rachanain

Monday, 13 October 2008

करें तो क्या करे ?????????????

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करें तो क्या करें?????????????? मित्रो, अक्सर हमें हिदायतों भरे ऐसे लेख पात्र- पत्रिकाओं में पढने को मिल जातें हैं, जो देखने-सुनने में तो का...
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Thursday, 2 October 2008

कुकिंग गैस की समस्या और शिकायत की अपेक्षा

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कुकिंग गैस की समस्या और शिकायत की अपेक्षा १५अगस्त के बाद आज २ अक्तूबर को आप सब से रु-ब-रु हो रहा हूँ अपने ब्लॉग पर इकोनोमिक टाइम्स के आज के ...
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Thursday, 14 August 2008

स्वंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर विशेष

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क्योंकि "निःस्वार्थी", "संतोषी" "कर्मयोगी", "ज्ञानी" न थे हम ( भाई नीरज जी का आदेश है कि एक ही विषय ...
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Wednesday, 13 August 2008

श्रद्धा

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श्रद्धा (४३) ज्यों रहे स्वामी सम्मुख श्वान सदा रोटियों - बोटियों हेतु दुम हिलाते त्यों डरे-सहमें से स्वार्थी मातहत रहे अधिकारियों का चरित...
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Wednesday, 6 August 2008

श्रद्धा

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श्रद्धा (४२) कुचले- रौन्दें जाने पर भी पेडों ने आशाओं, उमंगों से न बढ़ना छोड़ा जब तलक रही जमीं जड़ें धरा में बिपरीत हालातों से न लड़ना छोड़...
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Tuesday, 29 July 2008

श्रद्धा

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श्रद्धा (४१) एक अकेला अबोध बालक भी खुशियाँ तो पा ही लेता है नाना भांति के खेल रचा कर अपने मन की कर ही लेता है हम अनजाने उसको बाधित कर...
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Tuesday, 22 July 2008

श्रद्धा

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श्रद्धा (४०) "घटना" सिर्फ़ हादसों का होना ही होता है अन्य जिसे न्यून,भुक्तभोगी बड़ासमझता है लगती जुड़ने ज्यों-ज्यों स्वार्थी ...
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Mumukshh Ki Rachanain
मैं बचपन से ही स्वान्तः-सुखाय प्रवृत्ति का रहा हूँ. परीक्षाओं में ज्यादा अंक लाने से ज्यादा महत्त्व मूलभूत ज्ञान को दिया. इलाहबाद (प्रयाग) शहर का होने के कारण बचपन से ही साहित्य की ओर झुकाव रहा. जब मैं इंजीनियरिंग के अन्तिम वर्ष में था तो उस समय हमने अपने कुछ सहयोगियों( श्री अजामिल जी, प्रदीप सौरभ जी, दिनेश मिश्रा जी आदि) के साथ भारत का प्रथम बाल समाचार पत्र "नन्हें-मुन्नों का अख़बार" प्रकाशित किया था. बचपन से आज तक समय-बेसमय कुछ न कुछ लिखता ही रहा, पर ज्यादातर स्वान्तः-सुखाय ही. पांडुलिपियाँ धीरे -धीरे ब्लोग्स पर अवतरित हो रहीं हैं. इलेक्ट्रिकल मैन्टेनेन्स में होने के कारण आने और महसूस होने वाली दिक्कतों को मद्देनजर रखते हुए मह्तातों के बेहतर कैरियर के लिए कई किताबे भी बिना धन-लाभ की अभिलाषा के स्वान्तः-सुखाय ही लिखी. यूनिवर्सिटी लेवल एवं राज्य स्तर किकेट प्रतियोगिताओं में भी भाग लिया. हिंडाल्को क्रिकेट टीम का कई वर्षों तक सदस्य रहा. बायोकेमिक एवं बैच-फ्लावर चिकत्सा पद्धिति में भी कुछ जानकारी हासिल कर सकने की भी हिमाकत की है. सम्प्रति शेयर मार्केट पर ट्रेडिंग से सम्बंधित एक पुस्तक लिखने में व्यस्त हूँ.
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