Mumukshh Ki Rachanain

Sunday, 12 September 2010

चाहा जिसने जले-भुने, लगा "आग" छुप जाता है

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बन "याचक" जो डटा रहा , "गुरु ज्ञान" वह पाता है चाहा जिसने जले-भुने, लगा "आग" छुप जाता है "अनुभव" जि...
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Monday, 6 September 2010

'बातूनी' ने खबर पाई , 'महफ़िल' में फिर सुनाने को

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थे जितना ही तुम व्याकुल, अपना कृतत्व बताने को था उतना मैं भी व्याकुल, अपना अस्तित्व जताने को जो जितना ही भ्रमित -सा, सपने उतने लेकर आये ...
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Saturday, 12 June 2010

इन "बेढब- से" खर्चों पर ही, पहले रोक लगाने को

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उजड़ी होगी बगिया कोई, कुछ पल महल सजाने को खर्चे होंगें "पैसे" ही तो,अपना अहम् दिखाने को कैसे कितना काटें किसका, हरदम सोंच वहा...
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Sunday, 28 February 2010

होली का पर्व, नफ़रत, हसरत और कसरत, ये होली सबकी

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होली का पर्व होली का पर्व रंगों का पर्व, मस्ती का पर्व, ख़ुशी का पर्व, मदहोशी का पर्व, खाने-पीने का पर्व, खिलाने-पिलाने का पर...
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Wednesday, 24 February 2010

संवेदनाएं. अनजाना/अनजानी, दुर्लभ फिल्म

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संवेदनाएं दिल, निंदिया, स्ट्रेस, भय और मजबूरियाँ भले ही इन्सान को सबसे ज्यादा कष्ट दे रही है, पर इनके प्रति "संवेदनाओं" के दर्शन श...
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Saturday, 31 October 2009

मजबूरियाँ, गिले-शिकवे और प्रगति पर प्रकृति की मार

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मजबूरियाँ दिल, निंदिया, स्ट्रेस, भय के बाद इन्सान को सबसे ज्यादा जो चीज़ कष्ट दे रही है, वो शायद उसकी "मजबूरियाँ" ही हैं. म...
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Friday, 30 October 2009

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आभारव्यक्ति मेरी पिछली पोस्ट "भय, महत्त्व / महत्वहीन....." (२४ अक्टूबर ) पर प्रतिक्रिया व्यक्त करने वाले निम्न सभी सम्मानीय क्षु...
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Mumukshh Ki Rachanain
मैं बचपन से ही स्वान्तः-सुखाय प्रवृत्ति का रहा हूँ. परीक्षाओं में ज्यादा अंक लाने से ज्यादा महत्त्व मूलभूत ज्ञान को दिया. इलाहबाद (प्रयाग) शहर का होने के कारण बचपन से ही साहित्य की ओर झुकाव रहा. जब मैं इंजीनियरिंग के अन्तिम वर्ष में था तो उस समय हमने अपने कुछ सहयोगियों( श्री अजामिल जी, प्रदीप सौरभ जी, दिनेश मिश्रा जी आदि) के साथ भारत का प्रथम बाल समाचार पत्र "नन्हें-मुन्नों का अख़बार" प्रकाशित किया था. बचपन से आज तक समय-बेसमय कुछ न कुछ लिखता ही रहा, पर ज्यादातर स्वान्तः-सुखाय ही. पांडुलिपियाँ धीरे -धीरे ब्लोग्स पर अवतरित हो रहीं हैं. इलेक्ट्रिकल मैन्टेनेन्स में होने के कारण आने और महसूस होने वाली दिक्कतों को मद्देनजर रखते हुए मह्तातों के बेहतर कैरियर के लिए कई किताबे भी बिना धन-लाभ की अभिलाषा के स्वान्तः-सुखाय ही लिखी. यूनिवर्सिटी लेवल एवं राज्य स्तर किकेट प्रतियोगिताओं में भी भाग लिया. हिंडाल्को क्रिकेट टीम का कई वर्षों तक सदस्य रहा. बायोकेमिक एवं बैच-फ्लावर चिकत्सा पद्धिति में भी कुछ जानकारी हासिल कर सकने की भी हिमाकत की है. सम्प्रति शेयर मार्केट पर ट्रेडिंग से सम्बंधित एक पुस्तक लिखने में व्यस्त हूँ.
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