Mumukshh Ki Rachanain
Sunday, 12 September 2010
चाहा जिसने जले-भुने, लगा "आग" छुप जाता है
›
बन "याचक" जो डटा रहा , "गुरु ज्ञान" वह पाता है चाहा जिसने जले-भुने, लगा "आग" छुप जाता है "अनुभव" जि...
26 comments:
Monday, 6 September 2010
'बातूनी' ने खबर पाई , 'महफ़िल' में फिर सुनाने को
›
थे जितना ही तुम व्याकुल, अपना कृतत्व बताने को था उतना मैं भी व्याकुल, अपना अस्तित्व जताने को जो जितना ही भ्रमित -सा, सपने उतने लेकर आये ...
28 comments:
Saturday, 12 June 2010
इन "बेढब- से" खर्चों पर ही, पहले रोक लगाने को
›
उजड़ी होगी बगिया कोई, कुछ पल महल सजाने को खर्चे होंगें "पैसे" ही तो,अपना अहम् दिखाने को कैसे कितना काटें किसका, हरदम सोंच वहा...
21 comments:
Sunday, 28 February 2010
होली का पर्व, नफ़रत, हसरत और कसरत, ये होली सबकी
›
होली का पर्व होली का पर्व रंगों का पर्व, मस्ती का पर्व, ख़ुशी का पर्व, मदहोशी का पर्व, खाने-पीने का पर्व, खिलाने-पिलाने का पर...
14 comments:
Wednesday, 24 February 2010
संवेदनाएं. अनजाना/अनजानी, दुर्लभ फिल्म
›
संवेदनाएं दिल, निंदिया, स्ट्रेस, भय और मजबूरियाँ भले ही इन्सान को सबसे ज्यादा कष्ट दे रही है, पर इनके प्रति "संवेदनाओं" के दर्शन श...
19 comments:
Saturday, 31 October 2009
मजबूरियाँ, गिले-शिकवे और प्रगति पर प्रकृति की मार
›
मजबूरियाँ दिल, निंदिया, स्ट्रेस, भय के बाद इन्सान को सबसे ज्यादा जो चीज़ कष्ट दे रही है, वो शायद उसकी "मजबूरियाँ" ही हैं. म...
41 comments:
Friday, 30 October 2009
›
आभारव्यक्ति मेरी पिछली पोस्ट "भय, महत्त्व / महत्वहीन....." (२४ अक्टूबर ) पर प्रतिक्रिया व्यक्त करने वाले निम्न सभी सम्मानीय क्षु...
2 comments:
‹
›
Home
View web version