Mumukshh Ki Rachanain

Monday, 27 April 2009

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दासी कहलाने में गौरव रहने दो मुझको चरणों में हैं पत्थर के तो क्या हुआ हाड़- मांस का मानव भी अब पत्थर -सा ही बुत बना हुआ चाहा दिल ...
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Monday, 20 April 2009

श्रद्धा

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श्रद्धा (५२) छोड़ दिया चूजों ने भी माँ-संग फुदक -फुदक जब उड़ना सीखा रही चाह , उत्साह जब तलक गगन-नापने में ही उठना दीखा उदर- अग्नि ने सुध धर...
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Monday, 13 April 2009

दोहे

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हो दोहन भरपूर (१) भिड़े स्वार्थ से स्वार्थ, जीतन को एक बार स्वारथ मिलन कराये, अंत समय थक-हार (२) पढ़-लिख कर साहब बनें, मदहोशी में चूर ...
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Monday, 6 April 2009

श्रद्धा

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श्रद्धा (५१) रही चाह किसको अपमानों की सम्मान सदा ही सबको भाता है हो व्यथित प्राणी कर्म - क्षेत्र में सुकून सदा ही घर में पाता है कितनी कैसी ...
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Wednesday, 1 April 2009

दोहे

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अप्रैल माह का प्रथम दिवस...... ........... अपनी विविधिता और विचित्रिता की कहानी लिए साल में एक बार दस्तक देता ही है. होली की हुडदंग के बाद ह...
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Monday, 30 March 2009

श्रद्धा

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नवरात्रि का पावन " श्रद्धामय" पर्व चल रहा है। सभी श्रद्धालु अपने-अपने ढंग से "माँ" की अर्चना हेतु यह पावन पर्व मनाने म...
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Tuesday, 24 March 2009

श्रद्धा

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श्रद्धा ( ४९) कर न सकी विपदाएं भी जब पस्त लिया " श्रद्धा -भाव" ने था जन्म तभी शिशु सा लुढ़काया-पुढ़काया यत्र-तत्र कालांतर में शक...
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Mumukshh Ki Rachanain
मैं बचपन से ही स्वान्तः-सुखाय प्रवृत्ति का रहा हूँ. परीक्षाओं में ज्यादा अंक लाने से ज्यादा महत्त्व मूलभूत ज्ञान को दिया. इलाहबाद (प्रयाग) शहर का होने के कारण बचपन से ही साहित्य की ओर झुकाव रहा. जब मैं इंजीनियरिंग के अन्तिम वर्ष में था तो उस समय हमने अपने कुछ सहयोगियों( श्री अजामिल जी, प्रदीप सौरभ जी, दिनेश मिश्रा जी आदि) के साथ भारत का प्रथम बाल समाचार पत्र "नन्हें-मुन्नों का अख़बार" प्रकाशित किया था. बचपन से आज तक समय-बेसमय कुछ न कुछ लिखता ही रहा, पर ज्यादातर स्वान्तः-सुखाय ही. पांडुलिपियाँ धीरे -धीरे ब्लोग्स पर अवतरित हो रहीं हैं. इलेक्ट्रिकल मैन्टेनेन्स में होने के कारण आने और महसूस होने वाली दिक्कतों को मद्देनजर रखते हुए मह्तातों के बेहतर कैरियर के लिए कई किताबे भी बिना धन-लाभ की अभिलाषा के स्वान्तः-सुखाय ही लिखी. यूनिवर्सिटी लेवल एवं राज्य स्तर किकेट प्रतियोगिताओं में भी भाग लिया. हिंडाल्को क्रिकेट टीम का कई वर्षों तक सदस्य रहा. बायोकेमिक एवं बैच-फ्लावर चिकत्सा पद्धिति में भी कुछ जानकारी हासिल कर सकने की भी हिमाकत की है. सम्प्रति शेयर मार्केट पर ट्रेडिंग से सम्बंधित एक पुस्तक लिखने में व्यस्त हूँ.
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